धर्मनगरी हरिद्वार में आयोजित एक भव्य अंतरधार्मिक सम्मेलन ने देश और दुनिया को सद्भाव, आपसी सम्मान और एकता का सशक्त संदेश दिया। इस सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के संतों, धर्मगुरुओं, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और एक स्वर में कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य मानवता, प्रेम और सेवा है, न कि विभाजन।
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज विभिन्न चुनौतियों और वैचारिक मतभेदों से गुजर रहा है, ऐसे में अंतरधार्मिक संवाद और सहयोग ही शांति और सामाजिक संतुलन का मार्ग है। संतों ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म कभी टकराव नहीं सिखाता, बल्कि सत्य, करुणा और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता है।
कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे नकारात्मक विचारधाराओं और सोशल मीडिया पर फैल रही नफरत से दूर रहकर, सेवा, संवाद और सकारात्मक सोच को अपनाएँ। सम्मेलन के दौरान पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक एकता जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
अंत में सभी धर्मगुरुओं ने मिलकर विश्व शांति, सामाजिक सौहार्द्र और मानव कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की। आयोजकों













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