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अरावली को कौन सा बड़ा खतरा है और क्यों चलाया जा रहा है संरक्षण अभियान?

अरावली पर्वतमाला, जो उत्तर भारत की प्राचीन और महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला है, आज गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र को सबसे बड़ा खतरा अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और अनियोजित शहरी विस्तार से है। इन गतिविधियों से अरावली की मिट्टी, वन और जल स्रोत नष्ट हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता खतरे में है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए तीर्थ सेवा न्यास ने अरावली क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है लोगों में प्रकृति संरक्षण का संदेश फैलाना और जनसहभागिता बढ़ाना, ताकि अरावली पर्वतमाला का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

तीर्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष तीर्थाचार्य राम विशाल दास जी महाराज के नेतृत्व में आयोजित होने वाली यह पहल सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में सतत विकास, जल और वन संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी का संदेश भी देगी।

अभियान के दौरान लोगों को वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के महत्व से अवगत कराया जाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

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