केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देश की शिक्षा प्रणाली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मंत्रालय ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 से कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड एजुकेशन को अनिवार्य रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक, तकनीकी और रोजगारोन्मुखी कौशल से जोड़ना है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, आने वाले समय में शिक्षा और रोजगार के स्वरूप में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में छात्रों को प्रारंभिक स्तर से ही डिजिटल और प्रोफेशनल स्किल्स से परिचित कराना आवश्यक हो गया है। इसी सोच के तहत यह निर्णय लिया गया है।
किन-किन स्किल्स पर रहेगा फोकस
नई व्यवस्था के अंतर्गत छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण कौशल सिखाए जाएंगे, जिनमें प्रमुख रूप से:
- डिजिटल स्किल्स और टेक्नोलॉजी का उपयोग
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बुनियादी जानकारी
- बेसिक कोडिंग और प्रोग्रामिंग
- फाइनेंशियल लिटरेसी (पैसों का प्रबंधन)
- उद्यमिता और स्टार्टअप से जुड़ी समझ
इन विषयों को छात्रों की उम्र और कक्षा के अनुसार सरल और व्यावहारिक तरीके से पढ़ाया जाएगा, ताकि वे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि सीखने का अवसर समझें।
स्कूलों और शिक्षकों की भूमिका
इस नई पहल को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही स्कूलों में डिजिटल लैब, स्किल लैब और प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग को बढ़ावा दिया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि राज्य सरकारों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
ड्रॉपआउट रेट में कमी की उम्मीद
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्किल-बेस्ड पढ़ाई से छात्रों की रुचि शिक्षा में बनी रहेगी, जिससे स्कूल छोड़ने वाले छात्रों (Dropout Rate) की संख्या में कमी आ सकती है। जब छात्र यह समझ पाएंगे कि वे जो सीख रहे हैं, उसका वास्तविक जीवन में उपयोग है, तो वे पढ़ाई से अधिक जुड़ाव महसूस करेंगे।
नई शिक्षा नीति (NEP) को मिलेगी मजबूती
सरकार का कहना है कि यह फैसला नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों को और मजबूती प्रदान करेगा। NEP का लक्ष्य है कि शिक्षा को लचीला, समावेशी और कौशल-आधारित बनाया जाए। यह नई व्यवस्था छात्रों को केवल परीक्षा केंद्रित नहीं, बल्कि जीवन और करियर केंद्रित बनाएगी।
भविष्य के लिए तैयार होंगे छात्र
आज के दौर में जहां तकनीक और रोजगार की मांग तेजी से बदल रही है, वहां यह पहल छात्रों को भविष्य की नौकरियों और चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करने में मदद मिलेगी और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा जगत में फैसले का स्वागत
इस फैसले का शिक्षाविदों, अभिभावकों और छात्रों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह भारतीय शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का यह बड़ा फैसला देश की शिक्षा को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ी न केवल शिक्षित, बल्कि कुशल और आत्मनिर्भर बन सकेगी।













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