आज देशभर में तुलसी दिवस श्रद्धा, आस्था और जागरूकता के साथ मनाया जा रहा है। सनातन परंपरा में माता तुलसी को देवी स्वरूप माना गया है और उन्हें घर-घर की संरक्षिका कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी न केवल आध्यात्मिक शुद्धता प्रदान करती हैं, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत हैं।
धर्माचार्यों और आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि तुलसी का पौधा वातावरण को शुद्ध करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक है। आयुर्वेद में तुलसी को औषधियों की रानी कहा गया है, जिसका उपयोग सर्दी-खांसी, तनाव और इम्यूनिटी बढ़ाने में किया जाता है।
तुलसी दिवस के अवसर पर देश के कई मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक संस्थानों में विशेष पूजा-अर्चना, तुलसी रोपण और पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। संत समाज ने लोगों से अपील की कि वे तुलसी को केवल पूजा तक सीमित न रखें, बल्कि अपने जीवन और पर्यावरण से जोड़ें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में जब प्रदूषण और तनाव बढ़ रहा है, तब तुलसी जैसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक प्रतीक मानव जीवन के लिए और भी अधिक आवश्यक हो गए हैं।













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