सालाना ‘सिंदूर लेपन’ अनुष्ठान के कारण लिया गया निर्णय
मुंबई:
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित देश के सबसे प्रसिद्ध गणपति मंदिरों में से एक श्री सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 7 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2026 तक मंदिर में विराजमान भगवान गणेश की मूल प्रतिमा के दर्शन बंद रहेंगे।
इस दौरान मंदिर में आने वाले भक्त मुख्य मूर्ति के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर सकेंगे, क्योंकि प्रतिमा को विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए आवरण (veil) में रखा जाएगा। यह व्यवस्था मंदिर की पारंपरिक धार्मिक परंपराओं के तहत हर वर्ष की जाती है।
क्यों बंद रहेंगे सिद्धिविनायक के मूल दर्शन?
मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय हर साल होने वाले ‘सिंदूर लेपन’ (Vermillion Application) अनुष्ठान के कारण लिया गया है।
इस विशेष धार्मिक प्रक्रिया में:
- भगवान गणेश की प्रतिमा पर विशेष सिंदूर लेप किया जाता है
- तुलसी, सन, पुष्प-मालाएं और पारंपरिक आभूषण अर्पित किए जाते हैं
- वैदिक मंत्रोच्चारण और विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है
यह अनुष्ठान भगवान गणेश की ऊर्जा, शुद्धता और दिव्यता को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
दर्शन व्यवस्था में क्या रहेगा बदलाव?
मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की हैं:
- मुख्य मूर्ति के स्थान पर प्रतिमा की प्रतिकृति (Replica Idol) के दर्शन उपलब्ध होंगे
- भक्त सामान्य पूजा, आरती और दर्शन कर सकेंगे
- भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतज़ाम किए गए हैं
- ऑनलाइन दर्शन और दान सुविधाएं भी चालू रहेंगी
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और मंदिर की व्यवस्थाओं में सहयोग करें।
कब फिर से होंगे मूल प्रतिमा के दर्शन?
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार:
12 जनवरी 2026 को दोपहर 1 बजे के बाद
भगवान सिद्धिविनायक की मूल प्रतिमा के दर्शन फिर से शुरू कर दिए जाएंगे।
इस दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है, इसलिए दर्शन के लिए समय प्रबंधन और दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
सिद्धिविनायक मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
सिद्धिविनायक मंदिर न केवल मुंबई बल्कि पूरे भारत में आस्था का एक बड़ा केंद्र है।
- हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं
- देश-विदेश के राजनेता, कलाकार, उद्योगपति और आम भक्त यहां मन्नत मांगते हैं
- बुधवार, संकष्टी चतुर्थी और गणेश उत्सव के दौरान विशेष भीड़ रहती है
धार्मिक मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूर्ण होती है, इसी कारण इसे मनोकामना सिद्धि का मंदिर भी कहा जाता है।
धार्मिक परंपरा और आस्था का प्रतीक
सिंदूर लेपन जैसे अनुष्ठान यह दर्शाते हैं कि:
- भारतीय मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि जीवित परंपराएं हैं
- धर्म और संस्कृति का संरक्षण पीढ़ियों से चला आ रहा है
- आस्था, अनुशासन और नियमों का पालन ही धर्म का मूल है
ऐसे अनुष्ठान भक्तों के मन में विश्वास, श्रद्धा और आध्यात्मिक जुड़ाव को और अधिक मजबूत करते हैं।













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