हरिद्वार/अयोध्या/देशभर | 29 दिसंबर:
वर्ष 2025 के अंतिम दिनों में 29 दिसंबर को देशभर में धर्म और संस्कृति से जुड़े आयोजनों ने विशेष महत्व प्राप्त किया। गंगा तटों, प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
धार्मिक विद्वानों और संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में भारतीय संस्कृति के मूल तत्व—सत्य, सेवा, करुणा और अनुशासन—पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में आध्यात्मिक मूल्यों का पालन ही मानसिक शांति और सामाजिक संतुलन का मार्ग है।
हरिद्वार, काशी, उज्जैन और अयोध्या जैसे तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखी गई। कई स्थानों पर नववर्ष के स्वागत को ध्यान में रखते हुए शुद्धिकरण यज्ञ, दीपदान और सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया गया। युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने यह संकेत दिया कि नई पीढ़ी भी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने लगी है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत लोकनृत्य, शास्त्रीय संगीत और धार्मिक कथाओं का मंचन किया गया, जिससे देश की विविध सांस्कृतिक धरोहर को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता और सेवा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, एकता और नैतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं। 29 दिसंबर का दिन धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।













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