वर्ष के अंतिम सप्ताह में देशभर में धर्म और संस्कृति से जुड़े आयोजनों की रौनक देखने को मिली। 29 दिसंबर को प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने भाग लिया।
उत्तर भारत के तीर्थ स्थलों पर गंगा आरती, हवन और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन हुआ, वहीं दक्षिण और पश्चिम भारत में पारंपरिक उत्सवों और लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। कई स्थानों पर वर्ष के समापन और नववर्ष के स्वागत को लेकर आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
धर्माचार्यों और विद्वानों ने अपने संदेशों में भारतीय संस्कृति के मूल्यों, सेवा भावना और सामाजिक एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। स्वयंसेवी संगठनों ने भी सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष के अंत में बढ़ती धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां लोगों को मानसिक शांति देने के साथ-साथ भारतीय परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।













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