सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल बोर्ड की संख्या बढ़ाने की योजना को तेज़ कर दिया है। नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकारी स्कूलों में आधुनिक तकनीक को शामिल करने का उद्देश्य छात्रों को इंटरएक्टिव और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना है। स्मार्ट क्लास के माध्यम से वीडियो, एनिमेशन और डिजिटल कंटेंट का उपयोग कर विषयों को सरल और रोचक बनाया जाएगा, जिससे छात्रों की समझ और रुचि दोनों बढ़ेंगी।
विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के स्कूलों को इस योजना में प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि शिक्षा में शहरी-ग्रामीण अंतर को कम किया जा सके। डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट डिवाइस की मदद से अब दूरदराज़ के क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों को भी आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्मार्ट क्लास को पाठ्यक्रम से जोड़ते हुए शिक्षकों को भी डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे शिक्षक तकनीक का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और छात्रों को अधिक प्रभावी तरीके से पढ़ा सकेंगे। इसके साथ ही ऑनलाइन शिक्षण सामग्री और ई-कंटेंट को भी सरकारी स्कूलों में उपलब्ध कराया जाएगा।
अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट क्लासरूम से न केवल छात्रों की उपस्थिति और सीखने की क्षमता में सुधार होगा, बल्कि ड्रॉपआउट दर भी कम हो सकती है। तकनीक आधारित शिक्षा छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2026 सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा के विस्तार का महत्वपूर्ण वर्ष साबित हो सकता है, जिससे लाखों छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा प्राप्त होगी।













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