देश में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने नए साल 2026 में नई और सख़्त रणनीति लागू करने के संकेत दिए हैं। खासतौर पर उत्तर भारत के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है, जिसे देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बहुस्तरीय कार्ययोजना पर काम कर रही हैं।
🔹 इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा
नई रणनीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकारी वाहनों और सार्वजनिक परिवहन में चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों और कारों को शामिल करने की योजना है, ताकि पेट्रोल-डीजल से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
🔹 निर्माण कार्यों पर सख़्त निगरानी
शहरों में निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल को प्रदूषण का बड़ा कारण माना गया है। नए साल से निर्माण स्थलों पर डस्ट कंट्रोल उपाय, पानी का छिड़काव और नियमों का पालन अनिवार्य किया जाएगा। उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
🔹 औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण
उद्योगों से निकलने वाले धुएं और जहरीली गैसों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को स्वच्छ तकनीक अपनाने के निर्देश दिए जाएंगे। तय मानकों का पालन न करने पर सख़्त कदम उठाए जा सकते हैं।
🔹 हरित क्षेत्र और पौधरोपण पर जोर
2026 में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाने की योजना है। सड़कों के किनारे, खाली ज़मीनों और शहरी इलाकों में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे वायु की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
🔹 आम जनता की भूमिका अहम
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। निजी वाहनों के कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और कचरा न जलाने जैसे कदम प्रदूषण कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
🔹 स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बढ़ता वायु प्रदूषण श्वसन, हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
नए साल में लागू होने वाली यह नई रणनीति देश को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण की ओर ले जाने की एक अहम पहल मानी जा रही है।













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