हरिद्वार, 25 दिसंबर 2025: देवराजगंगा नगरी हरिद्वार में धार्मिक गतिविधियों (पूजा, सेवा, यज्ञ आदि) के लिए अनुचित और मनमाने दाम वसूले जाने का मुद्दा उठा है। स्थानीय श्रद्धालु, यात्रियों और आम नागरिकों का आरोप है कि कई जगहों पर धार्मिक कर्मों के नाम पर सामान्य से भी अधिक शुल्क लिया जा रहा है, जिससे तीर्थस्थल की पवित्रता पर प्रश्न उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूजा, हवन, आरती और अन्य अनुष्ठानों के लिए बिना वजह अधिक भुगतान मांगना श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम जनता पर भी वित्तीय दबाव बनाता है। उनके अनुसार इस तरह की अनियंत्रित वसूली से धार्मिक अनुभव की पवित्र भावना प्रभावित होती है और यह हरिद्वार जैसे धार्मिक नगरी की साख के अनुरूप नहीं है।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन और मंदिर व्यवस्थापकों से अपील की है कि वे सुस्पष्ट शुल्क नीति लागू करें, जिससे किसी भी तरह की मनमानी वसूली रोकी जा सके और हरिद्वार आने वाले तीर्थयात्रियों को संतोषजनक धार्मिक अनुभव मिल सके।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हरिद्वार जैसे शहरी धार्मिक केंद्रों में पारदर्शी शुल्क प्रणाली और सेवाओं का नियंत्रण आवश्यक है, ताकि श्रद्धालु पवित्र स्थान पर आस्था के साथ आ सकें और धार्मिक गतिविधियों के लिए उचित, निष्पक्ष और अनुशासित तरीके से शुल्क का पालन किया जा सके।













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