नई दिल्ली, 26 दिसंबर 2025: विशेषज्ञों ने चेताया है कि वायु प्रदूषण भारत में कोविड‑19 के बाद सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यूके में कार्यरत भारतीय मूल के फेफड़े और हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण स्तरों से सांस की बीमारियाँ, हृदय रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं और यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह समस्या और विकट रूप ले सकती है।
ब्रिटेन स्थित विशेषज्ञों के अनुसार वायु में मौजूद PM2.5 और अन्य जहरीले कण हमारे शरीर में गहराई से प्रवेश कर लेते हैं, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर, आंखों व गले में जलन, छाती में जकड़न, बार‑बार संक्रमण और फेफड़ों तथा दिल के रोगों का खतरा बढ़ता है।
दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में आने वाले सर्दियों के मौसम में स्मॉग और गंभीर प्रदूषण के कारण अस्पतालों में सांस और फेफड़ों की तकलीफ से पीड़ित मरीजों की संख्या 20% से 30% तक बढ़ गई है। यह डेटा संकेत देता है कि वायु की खराब गुणवत्ता का सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
डॉक्टरों ने कहा है कि वायु प्रदूषण अकेला एक मामूली स्वास्थ्य जोखिम नहीं, बल्कि यह पुरानी बीमारियों, दिल‑फेफड़ों की समस्याओं और यहां तक कि मौतों का भी कारण बन रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जागरूकता, स्वच्छ ऊर्जा, कड़े पर्यावरण नियम और प्रदूषण नियंत्रण नीतियाँ लागू किए बिना, यह संकट और बढ़ सकता है
विशेषज्ञों ने बताया कि कोरोना महामारी जैसी गंभीर स्थिति के बाद भी, वायु प्रदूषण का प्रभाव स्वास्थ्य पर लंबी अवधि के लिए और भी अधिक गंभीर हो सकता है क्योंकि यह अविश्वसनीय तरीके से शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करता है — न केवल फेफड़ों को।
प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याओं को रोकने के लिए विशेषज्ञों ने लोगों से:
- बाहर के समय को कम करने
- मास्क और एयर प्यूरीफायर का उपयोग
- घर में पौष्टिक और संतुलित भोजन लेने
- गंभीर मौसम में बाहर जाने से बचने की सलाह दी है।













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