देश में लगातार बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त कदम उठाने का संकेत दिया है। वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों, वाहनों और निर्माण गतिविधियों पर कड़ी निगरानी बढ़ाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, बड़े शहरों के साथ-साथ अब छोटे शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में भी एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार की योजना है कि स्वच्छ हवा और हरित पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और वृक्षारोपण अभियानों को और तेज़ किया जाए। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों को भी अनिवार्य बनाने पर विचार किया जा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुँच जाता है, जिससे बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ता है। ऐसे में सख्त नियम और जनभागीदारी ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकते हैं।
सरकार ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें, सार्वजनिक परिवहन को अपनाएँ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएँ। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह कदम प्रभावी ढंग से लागू हुए, तो आने वाले समय में देश की वायु गुणवत्ता में सुधार संभव है।













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