आज देशभर में संकष्टी चतुर्थी व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत भगवान श्री गणेश को समर्पित होता है और इसे संकटों से मुक्ति, मानसिक शांति और जीवन में सफलता प्राप्त करने का विशेष उपाय माना जाता है। पौष माह की यह संकष्टी चतुर्थी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन से बाधाएँ दूर होती हैं और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं। संध्या काल में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
पंडितों और धर्माचार्यों के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा, मोदक, लड्डू और लाल पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व विशेष रूप से उन लोगों के लिए अधिक बताया गया है, जो जीवन में मानसिक तनाव, आर्थिक समस्याओं या कार्य में रुकावटों का सामना कर रहे हैं। माना जाता है कि इस व्रत को नियमित रूप से करने से व्यक्ति को धैर्य, बुद्धि और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माता पार्वती ने भी संतान सुख और पारिवारिक कल्याण के लिए यह व्रत किया था। तभी से संकष्टी चतुर्थी को संकटों से रक्षा करने वाला व्रत माना जाने लगा। आज के दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और गणेश आरती का आयोजन किया जा रहा है।
आध्यात्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि संकष्टी चतुर्थी केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, श्रद्धा और सकारात्मक सोच को अपनाने का संदेश भी देती है। नए वर्ष की शुरुआत में यह व्रत जीवन को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।













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