तेजी से बदलते सामाजिक और वैश्विक परिवेश के बीच भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के संरक्षण को लेकर देशभर के धार्मिक संस्थान सक्रिय हो गए हैं। 3 जनवरी को विभिन्न धार्मिक संगठनों और आश्रमों द्वारा संस्कृति-संरक्षण अभियान को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इन संस्थानों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव से पारंपरिक संस्कार और सांस्कृतिक मूल्य धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं, जिन्हें पुनः सशक्त करना समय की आवश्यकता है।
धार्मिक संस्थानों द्वारा वेद-पाठ, योग, ध्यान, संस्कार शिक्षा, भारतीय दर्शन और नैतिक मूल्यों पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और सांस्कृतिक शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर गुरुकुल पद्धति और पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
धार्मिक नेताओं का कहना है कि भारतीय संस्कृति केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है। समाज में सद्भाव, नैतिकता और सामाजिक एकता बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका है। इसी उद्देश्य से धार्मिक संस्थान समाज के हर वर्ग तक संस्कृति और संस्कार का संदेश पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों की यह पहल आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगी।













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