आज पुत्रदा एकादशी व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की प्राप्ति, संतान के दीर्घायु, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार पुत्रदा एकादशी पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस व्रत के प्रभाव से निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है और संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं।
आज का शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: प्रातः काल
- पूजा का शुभ समय: प्रातः 7:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
- पारण (व्रत खोलने) का समय: द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद
(स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है)
पुत्रदा एकादशी पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- व्रत का संकल्प लें और घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें
- भगवान श्री विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- तुलसी पत्र, पीले पुष्प, फल और पंचामृत अर्पित करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- विष्णु सहस्रनाम या पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें
- संतान सुख और परिवार की मंगल कामना करें
पौराणिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन काल में राजा सुकर्मा और रानी को संतान नहीं थी। महर्षियों के निर्देश पर उन्होंने पुत्रदा एकादशी का व्रत किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुण्यवान संतान की प्राप्ति हुई। तभी से यह व्रत संतान प्राप्ति और संरक्षण के लिए विशेष माना जाने लगा।
व्रत का महत्व
- संतान से जुड़े दोषों का निवारण
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि
- आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्ति
निष्कर्ष
पुत्रदा एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और संकल्प का पर्व है। इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है और संतान सुख का मार्ग प्रशस्त करती है।













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