देश में बढ़ती बेरोज़गारी की चुनौती को देखते हुए सरकार और सामाजिक संगठनों ने युवाओं के लिए व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक और रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे बदलते समय की ज़रूरतों के अनुसार स्वयं को सक्षम बना सकें।
कार्यक्रम के तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग, डाटा एंट्री, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबिंग, सिलाई-कढ़ाई, मोबाइल रिपेयरिंग और अन्य तकनीकी कौशल सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरी तरह व्यावहारिक होगा, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार पाने या स्वरोज़गार शुरू करने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही युवाओं को इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप के अवसर भी दिए जाएंगे, ताकि वे उद्योगों में वास्तविक कार्य अनुभव प्राप्त कर सकें। कई निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स ने इस पहल में सहयोग देने की सहमति जताई है, जिससे प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
सरकार द्वारा प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा, जो उन्हें नौकरी प्राप्त करने में सहायक होगा। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण निःशुल्क रखा गया है, साथ ही कुछ मामलों में यात्रा भत्ता और उपकरण सहायता भी प्रदान की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कौशल विकास कार्यक्रम न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा। यदि इस पहल को निरंतर और प्रभावी रूप से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में युवा शक्ति आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।













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