देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और ईंधन संकट को देखते हुए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जा रही सब्सिडी, टैक्स में छूट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से लोगों में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की रुचि तेज़ी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाले वाहनों की तुलना में शून्य उत्सर्जन करते हैं, जिससे वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। खासतौर पर महानगरों में बढ़ती स्मॉग की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार ने प्रमुख शहरों के साथ-साथ हाईवे और ग्रामीण क्षेत्रों में भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना को गति दी है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों और ऑटो-रिक्शा को सार्वजनिक परिवहन में शामिल किया जा रहा है, जिससे ईंधन की बचत के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
ऑटोमोबाइल कंपनियां भी अब सस्ती और लंबी रेंज वाले इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च कर रही हैं, जिससे मध्यम वर्ग के लिए EV खरीदना आसान हो रहा है। बैटरी तकनीक में हो रहे सुधार और चार्जिंग समय में कमी से उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले वर्षों में प्रदूषण के स्तर में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि देश को स्वच्छ और हरित भविष्य की ओर ले जाने में भी सहायक सिद्ध होगी।













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