परिजनों ने बताया कि सितंबर माह से उसकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई थी और पेट में तेज़ दर्द रहने लगा। जब स्थिति गंभीर हुई तो उसे पहले मुरादाबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। वहाँ जांच में पता चला कि उसके आंतों में गंभीर समस्या है, जिसके कारण संक्रमण फैल गया। इसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के AIIMS अस्पताल में भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी हालत और बिगड़ गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
डॉक्टरों ने इस दर्दनाक घटना को एक सशक्त चेतावनी के तौर पर लिया है। उनका कहना है कि आधुनिक युवाओं में फास्ट फूड की लत तेजी से बढ़ रही है और इसका पाचन प्रणाली, इम्यून सिस्टम और स्वास्थ्य पर गंभीर विपरीत प्रभाव हो सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अक्सर फास्ट फूड में उपयोग होने वाले रिफाइंड मैदा, अधिक तेल, रसायन और मोटा नमक पाचन तंत्र को कमजोर कर देते हैं, जिससे लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने माता‑पिता और युवाओं से अपील की है कि वे अपने खाने‑पीने की आदतों पर ध्यान दें और फास्ट फूड के स्थान पर पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें। फ्रूट, सब्जियाँ, दालें, साबुत अनाज और पर्याप्त पानी जैसी चीजें शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।
इस घटना ने समाज में बढ़ती फास्ट फूड संस्कृति और its health risks पर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों द्वारा कहा जा रहा है कि केवल मोटापा या बीमारियों का जोखिम ही नहीं, बल्कि कुछ मामलों में जीवन के लिए भी यह खतरा बन सकता है, अगर समय रहते सावधानियाँ नहीं बरती गईं।













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